मैं तो अपने गम भी फन्ना कर आया हूँ
इससे पहले कोई मेरी रात को बदनाम करे ,
मैं चाँद के दीदार को आया हूँ
रात गुजर जाती है सुबह के इंतज़ार मै
सुबह बुनती है ख्वाब रात के प्यार मै
मैं रात और दिन के बीच पिस्ता आया हूँ
टूट जाते है लोग अकशर खुशियों के रूठ जाने पर
मैं तो अपने गम भी फन्ना कर आया हूँ
लम्हा लम्हा टूटता हूँ मैं और मेरे सपने
महफ़िलों मै तन्हाईयाँ और तन्हाइयों मै अपने
बुनकर टूटी हुई सांसों को एक एक कदम चल आया हूँ
मुझे शौक नहीं तन्हाइयों का न गुरेज महफ़िलों से
भीगी हुई पलकों पे बोझ है भारी भारी सपनो के
जिंदगी की सच्चाइयों या अपनी रुस्बाइयों से
कर इश्क़ गम की परछाइयों से ,
कसौटी पर जिंदगी की मै कस्ता चला आया हूँ .
टूट जाते है लोग अकशर खुशियों के रूठ जाने पर
मैं तो अपने गम भी फन्ना कर आया हूँ
-पर्ल
मैं चाँद के दीदार को आया हूँ
रात गुजर जाती है सुबह के इंतज़ार मै
सुबह बुनती है ख्वाब रात के प्यार मै
मैं रात और दिन के बीच पिस्ता आया हूँ
टूट जाते है लोग अकशर खुशियों के रूठ जाने पर
मैं तो अपने गम भी फन्ना कर आया हूँ
लम्हा लम्हा टूटता हूँ मैं और मेरे सपने
महफ़िलों मै तन्हाईयाँ और तन्हाइयों मै अपने
बुनकर टूटी हुई सांसों को एक एक कदम चल आया हूँ
मुझे शौक नहीं तन्हाइयों का न गुरेज महफ़िलों से
भीगी हुई पलकों पे बोझ है भारी भारी सपनो के
जिंदगी की सच्चाइयों या अपनी रुस्बाइयों से
कर इश्क़ गम की परछाइयों से ,
कसौटी पर जिंदगी की मै कस्ता चला आया हूँ .
टूट जाते है लोग अकशर खुशियों के रूठ जाने पर
मैं तो अपने गम भी फन्ना कर आया हूँ
-पर्ल


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